Atal Bihari Vajpayee

भारतीय राजनीति का साहित्य के साथ सदैव गहरा संबंध रहा है। Bal Gangadhar Tilak, Mohandas Karamchand Gandhi, Bhagat Singh और Jawaharlal Nehru आदि अनेक शख़्सियत ऐसी हैं, जो एक कुशल राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ बेहतरीन लेखक भी थे। इसी शृंखला में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा सकता है Atal Bihari Vajpayee जी को। वे जितने लोकप्रिय राजनीतिज्ञ थे उतने ही लोकप्रिय कवि भी। लालक़िले के मंच से अनेक बार काव्य पाठ करने वाले अटल जी वाचिक परंपरा के सफल कवि रहे। उनके गीत और घनाक्षरियाँ लोगों को कंठस्थ हैं।
अपनी सहज बातचीत में वे जो चुटकियाँ लेते थे, उसके पीछे कहीं न कहीं वही मंचीय कौशल था जो वाचिक परंपरा के कवियों को वरदान में मिला होता है। उनकी रचनाओं में एक गहरा संदेश स्पष्ट दिखाई देता था। अपनी सोच और अपने चिंतन को सलीक़े से शब्दों में पिरोना उनको बख़ूबी आता था। उनकी काव्य प्रतिभा और वाक्पटुता सदैव उनके अनुगामियों के लिये प्रेरणा स्रोत रहेगी।