Category Archives: Kavita

Chaar Kauve The Kaale : Bhawani Prasad Mishra

This poem contains a revolutionary statement against political dictatorship. Continue reading

Gori Baithi Chhatt Par : Om Prakash Aditya

गोरी बैठी छत पर : ओमप्रकाश आदित्य उदास रमणी और हिन्दी के कवि। एक नवयुवती छज्जे पर बैठी है। वह उदास है। उसकी मुखमुद्रा को देखकर ऐसा लगता है, जैसे वह छज्जे से कूद कर आत्महत्या करने वाली हो। हिन्दी के … Continue reading

PAKISTAN ka Bomb : Shrad Joshi

पाकिस्तान का बम : शरद जोशी सुना है हमारे पाक पड़ोसी पाकिस्तान ने एक अदद एटम बम बना लिया है। बड़ी नाज़ुक सी खूबसूरत चीज़ है। अल्ला के फज़्ल से बन गया है। मरहूम जिया साहब के पास ‘आप जानते … Continue reading

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SONE KI BEEMARI : SHAMBHU SHIKHAR

सोने की बीमारी: शंभू शिखर आजकल हम अपने-आप से त्रस्त हैं सोने की भयंकर बीमारी से ग्रस्त हैं ना मौका देखते हैं, न दस्तूर सोते हैं भरपूर एक बार सोते-सोते इतना टाइम पास हो गया कि लोगों को हमारे मरने … Continue reading

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Gavaskar Ne Record Toda : SHARAD JOSHI

गावस्कर ने रेकार्ड तोड़ा : शरद जोशी जब गावस्कर ने ब्रेडमेन का रेकार्ड तोड़ा, देश के कई खिलाड़ियों ने अपने आप से एक सवाल किया- यह काम मैंने क्यों नहीं किया? मैंने क्यों नहीं तोड़ा ब्रेडमेन का रेकार्ड? यह प्रश्न अपने … Continue reading

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Gita Gyan aur Hariyana : Arun Gemini

गीता ज्ञान और हरियाणा : अरुण जैमिनी Krishna जी ने Gita का ज्ञान Hariyana में ही दिया इसलिये हरियाणे वालों ने ही उसे Seriously लिया लोग हरियाणे वालों के बारे में पता नहीं क्या-क्या बकते हैं पर Krishna जी अच्छी तरह जानते थे कि इतना … Continue reading

Itihaas Ka Parcha : Omprakash Aditya

इतिहास का पर्चा : ओमप्रकाश ‘आदित्य’ इतिहास परीक्षा थी उस दिन, चिंता से हृदय धड़कता था थे बुरे शकुन घर से चलते ही, दाँया हाथ फड़कता था मैंने सवाल जो याद किए, वे केवल आधे याद हुए उनमें से भी … Continue reading

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Jhansi Ki Rani : Subhadrakumari Chauhan

झाँसी की रानी : सुभद्रा कुमारी चौहान सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटि तानी थी बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी गुमी हुई आज़ादी की क़ीमत सबने पहचानी थी दूर फ़िरंगी को करने की सबने मन … Continue reading

Jana Gana Mana : Rabindranath Tagore

जय हे जय हे जय हे : रबीन्द्रनाथ टैगोर जन-गण-मन अधिनायक जय हे भारत-भाग्य-विधाता पंजाब-सिन्ध-गुजरात-मराठा द्राविड़-उत्कल-बंग विन्ध्य-हिमाचल, यमुना-गंगा उच्छल जलधि तरंग तव शुभ नामे जागे तव शुभ आशिष मांगे गाहे तव जय गाथा जन-गण-मंगलदायक जय हे भारत-भाग्य-विधाता जय हे, जय हे, … Continue reading

Ab Desh Mein Gandhi Mat Aana : Sunil Jogi

अब देश में गांधी मत आना : सुनील जोगी अब देश में गांधी मत आना, मत आना, मत आना सत्य, अहिंसा खोए अब तो, खेल हुआ गुंडाना आज विदेशी कंपनियों का, है भारत में ज़ोर देशी चीज़ें अपनाने का, करोगे … Continue reading

Vikas : Surendra Sharma

विकास : सुरेन्द्र शर्मा एक कमरा था जिसमें मैं रहता था माँ-बाप के संग घर बड़ा था इसलिए इस कमी को पूरा करने के लिए मेहमान बुला लेते थे हम! फिर विकास का फैलाव आया विकास उस कमरे में नहीं … Continue reading

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Jaago Phir Ek baar : Suryakant Tripathi Nirala

जागो फिर एक बार : सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जागो फिर एक बार! समर अमर कर प्राण गान गाये महासिन्धु से सिन्धु-नद-तीरवासी! सैन्धव तुरंगों पर चतुरंग चमू संग; ”सवा-सवा लाख पर एक को चढ़ाऊंगा गोविन्द सिंह निज नाम जब कहाऊंगा” किसने … Continue reading

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Vikas ka Bachcha

चिराग़ जैन Bihar में नये मुख्यमंत्री ने कहा है कि वे विकास को सबसे ऊपर रखेंगे। Delhi के मुख्यमंत्री ने भी कहा था कि वे विकास को सबसे ऊपर रखेंगे। Haryana, Maharashtra, Kerela, Telangana, Uttar Pradesh, Pashchim Bangal और अन्य … Continue reading

Ek Swar Mera Mila Lo : Sohanlal Dwivedi

एक स्वर मेरा मिला लो : सोहनलाल द्विवेदी वंदना के इन स्वरों में एक स्वर मेरा मिला लो! राग में जब मत्त झूलो तो कभी माँ को न भूलो अर्चना के रत्नकण में एक कण मेरा मिला लो! जब हृदय … Continue reading

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Kyon Pyar Kiya Tha : Harivansh Rai Bachchan

क्यों प्यार किया था : हरिवंश राय बच्चन अर्द्धरात्रि में सहसा उठ कर पलक संपुटों में मदिरा भर तुमने क्यों मेरे चरणों में अपना तन-मन वार दिया था क्षण भर को क्यों प्यार किया था ‘यह अधिकार कहाँ से लाया’ … Continue reading

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Agnipath : Harivansh Rai Bachchan

अग्निपथ : हरिवंश राय बच्चन अग्निपथ! अग्निपथ! अग्निपथ! वृक्ष हों भले खड़े हों घने, हों बड़े एक पत्र छाँह भी मांग मत! मांग मत! मांग मत! तू न थकेगा कभी तू न थमेगा कभी तू न मुड़ेगा कभी कर शपथ! कर … Continue reading

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Jeewan Ki Aapa-Dhapi mein : Hari Vansh Rai Bachchan

जीवन की आपाधापी में : हरिवंश राय बच्चन जीवन की आपाधापी में कब वक़्त मिला कुछ देर कहीं पर बैठ कभी ये सोच सकूँ जो किया, कहा, माना; उसमें क्या बुरा-भला जिस दिन मेरी चेतना जगी, मैंने देखा मैं खड़ा … Continue reading

Us Paar Na Jaane Kya Hoga : Harivansh Rai Bachchan

उस पार न जाने क्या होगा : हरिवंश राय बच्चन इस पार, प्रिये मधु है तुम हो उस पार न जाने क्या होगा यह चांद उदित होकर नभ में, कुछ ताप मिटाता जीवन का लहरा-लहरा ये शाखाएँ कुछ शोक भुला … Continue reading

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Ghazal : Khwaja Meer Dard

ग़ज़ल : ख़्वाजा मीर ‘दर्द’ तोहमतें चंद अपने ज़िम्मे धर चले जिस लिए आए थे हम सो कर चले ज़िन्दगी है या कोई तूफ़ान है हम तो इस जीने के हाथों मर चले आह! मत बस जी जला, तब जानिए जब … Continue reading

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Chidiya : Ritu Goel

मैं और मेरी चिड़िया : ॠतु गोयल एक थी चिड़िया एक थी मैं मैं थी चिड़िया या चिड़िया थी मैं यह समझना मुश्क़िल था क्योंकि इतनी समानताएँ थीं हम दोनों में कि लोग अक्सर मुझे चिड़िया कहते थे और चिड़िया … Continue reading

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