Jana Gana Mana : Rabindranath Tagore

जय हे जय हे जय हे : रबीन्द्रनाथ टैगोर जन-गण-मन अधिनायक जय हे भारत-भाग्य-विधाता पंजाब-सिन्ध-गुजरात-मराठा द्राविड़-उत्कल-बंग विन्ध्य-हिमाचल, यमुना-गंगा उच्छल जलधि तरंग

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Chal Gai-Shail Chaturvedi

चल गई : शैल चतुर्वेदी वैसे तो एक शरीफ इंसान हूं आप ही की तरह श्रीमान हूं मगर अपनी आंख

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Ahinsawadi : Pradeep Chobey

अहिंसावादी : प्रदीप चौबे बात बहुत छोटी थी श्रीमान् विज्ञापन था- पहलवान छाप बीड़ी और हमारे मुँह से निकल गया

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Hindi Diwas ke Dohe : Urmilesh Shankhdhar

हिंदी दिवस के दोहे : उर्मिलेश शंखधर हिंदी भाषा ही नहीं, और न सिर्फ़ ज़ुबान। यह अपने जह हिंद के

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Shikshak : Gemini Haryaanavi

विद्यार्थी नहले टीचर दहला : जैमिनी हरयाणवी कक्षा में विद्यार्थियों का शोर सुन कर प्रिंसिपल कहने लगा- “हे डियर टीचर

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Gori Baithi Chhatt Par : Om Prakash Aditya

गोरी बैठी छत पर : ओमप्रकाश आदित्य उदास रमणी और हिन्दी के कवि। एक नवयुवती छज्जे पर बैठी है। वह उदास

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Itihaas Ka Parcha : Omprakash Aditya

इतिहास का पर्चा : ओमप्रकाश ‘आदित्य’ इतिहास परीक्षा थी उस दिन, चिंता से हृदय धड़कता था थे बुरे शकुन घर

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Gavaskar Ne Record Toda : SHARAD JOSHI

गावस्कर ने रेकार्ड तोड़ा : शरद जोशी जब गावस्कर ने ब्रेडमेन का रेकार्ड तोड़ा, देश के कई खिलाड़ियों ने अपने आप

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Jhansi Ki Rani : Subhadrakumari Chauhan

झाँसी की रानी : सुभद्रा कुमारी चौहान सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटि तानी थी बूढ़े भारत में भी आई

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Ghazal : Aatm Prakash Shukla

आत्मप्रकाश शुक्ल : ग़ज़ल आग पी कर पचाने को दिल चाहिए इश्क़ की चोट खाने को दिल चाहिए नाम सुकरात का तो सुना है बहुत मौत से मन लगाने को दिल चाहिए अपने हम्माम में कौन नंगा नहीं आईना बन के जाने को दिल चाहिए राख हो कर शलभ ने शमा से कहा अपनी हस्ती मिटाने को दिल चाहिए आम यूँ तो बहुत ढाई अक्षर मगर प्यार कर के निभाने को दिल चाहिए

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Ghazal : Khwaja Meer Dard

ग़ज़ल : ख़्वाजा मीर ‘दर्द’ तोहमतें चंद अपने ज़िम्मे धर चले जिस लिए आए थे हम सो कर चले ज़िन्दगी है

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Sugandh lagti Ho Tum : Aatmprakash Shukla

आत्मप्रकाश शुक्ल : छंद लगती हो तुम छंद घनानंद के, छुअन रसख़ान जैसी शिल्प में बिहारी की सुगंध लगती हो

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Aatmprakash Shukla : Naache nadiya Beech Hilor

आत्मप्रकाश शुक्ल : नाचै नदिया बीच हिलोर नाचै नदिया बीच हिलोर बन में नचै बसंती मोर लागै सोरहों बसंत को

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Maati Ka Palang Mila : Aatmaprakash Shukla

काँच का खिलौना : आत्मप्रकाश शुक्ल माटी का पलंग मिला राख का बिछौना ज़िन्दगी मिली कि जैसे काँच का खिलौना

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Ab Desh Mein Gandhi Mat Aana : Sunil Jogi

अब देश में गांधी मत आना : सुनील जोगी अब देश में गांधी मत आना, मत आना, मत आना सत्य,

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Aaj Ki Raat Baanhon Mein : Aatmprakash Shukla

आत्मप्रकाश शुक्ल :  क्या पता ये मिलन फिर दुबारा न हो आज की रात बाँहों में सो जाइए क्या पता

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