Category Archives: Kavita

Suraj : Khushbu Sharma

सूरज : ख़ुशबू शर्मा ढल गया दे के रोशनी सूरज कह गया बात इक नई सूरज एक्टिंग डूबने की करता है डूबता तो नहीं कभी सूरज शाम होते ही छोड़ जाता है रोज़ ऑंखों में कुछ नमी सूरज रात गुज़री … Continue reading

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Shikshak : Gemini Haryaanavi

विद्यार्थी नहले टीचर दहला : जैमिनी हरयाणवी कक्षा में विद्यार्थियों का शोर सुन कर प्रिंसिपल कहने लगा- “हे डियर टीचर तुम बैठे हो और ये विद्यार्थी तुम्हारी परवाह न कर रहे रत्ती भर।” टीचर बोला अपनी कुर्सी से उठकर- “मैं … Continue reading

Patrakaar : Chirag Jain

पत्रकार : चिराग़ जैन छाप-छूप कर अख़बार एक सनसनीबाज़ पत्रकार रात तीन बजे घर आया तकिये में मुँह छुपाया और चादार तान के सो गया, इतनी देर में उसका अख़बार जनता के हवाले हो गया। इधर पत्रकार चैन से खर्राटे … Continue reading

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Roz peene ka bahana chahiye : Hullad Moradabadi

रोज़ पीने का बहाना चाहिए : हुल्लड़ मुरादाबादी हौसलों हो आज़ामाना चाहिए मुश्किलों में मुस्कुराना चाहिए खुजलियाँ जब सात दिन तक ना रुकें आदमी को तब नहाना चाहिए साँप नेता साथ में मिल जाएं तो लट्ठ नेता पर चलाना चाहिए … Continue reading

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Zarurat Kya Thi : Hullad Moradabadi

ज़रूरत क्या थी : हुल्लड़ मुरादाबादी आइना उनको दिखाने की ज़रूरत क्या थी वो हैं बन्दर ये बताने की ज़रूरत क्या थी घर पे लीडर को बुलाने की ज़रूरत क्या थी नाश्ता उसको कराने की ज़रूरत क्या थी दो के … Continue reading

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Kya Karegi Chandni : Hullad Muradabadi

क्या करेगी चांदनी : हुल्लड़ मुरादाबादी चांद औरों पर मरेगा, क्या करेगी चांदनी प्यार में पंगा करेगा, क्या करेगी चांदनी चांद से है ख़ूबसूरत, भूख में दो रोटियां कोई बच्चा जब मरेगा, क्या करेगी चांदनी डिगरियां हैं बैग में पर … Continue reading

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Khoon Bolta Hai : Arun Gemini

ख़ून बोलता है : अरुण जैमिनी सीमा पर जैसे ही छिड़ी लड़ाई देशभक्ति की भावना सब में उमड़ आई कुर्बानी का कुछ ऐसा चढ़ा जुनून कि घायल सैनिकों के लिए सभी देने लगे अपना-अपना ख़ून नेता हो या व्यापारी कवि … Continue reading

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Kavi

आत्मा के सौंदर्य का, शब्द रूप है काव्य मानव होना भाग्य है, कवि होना सौभाग्य –Gopaldas Niraj कविता करना खेल नहीं है, पूछो उन फ़नक़ारों से जो लोहे को काट रहे हैं, काग़ज़ की तलवारों से -अज्ञात इक दफ़ा पलकों … Continue reading

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Ahinsawadi : Pradeep Chobey

अहिंसावादी : प्रदीप चौबे बात बहुत छोटी थी श्रीमान् विज्ञापन था- पहलवान छाप बीड़ी और हमारे मुँह से निकल गया बीड़ी छाप पहलवान। बस, हमारे पहलवान पड़ोसी ताव खा गए ताल ठोककर मैदान में आ गए एक झापड़ हमारे गाल … Continue reading

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Hindi Diwas ke Dohe : Urmilesh Shankhdhar

हिंदी दिवस के दोहे : उर्मिलेश शंखधर हिंदी भाषा ही नहीं, और न सिर्फ़ ज़ुबान। यह अपने जह हिंद के नारे की पहचान॥ हिंदी में जन्मे-पले, बड़े हुए श्रीमान। अब इंग्लिश में कर रहे, हिंदी का अपमान॥ वायुयान में बैठकर, … Continue reading

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Chal Gai-Shail Chaturvedi

चल गई : शैल चतुर्वेदी वैसे तो एक शरीफ इंसान हूं आप ही की तरह श्रीमान हूं मगर अपनी आंख से बहुत परेशान हूं अपने आप चलती है लोग समझते हैं- चलाई गई है जानबूझ कर मिलाई गई है। एक … Continue reading

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