Suraj : Khushbu Sharma

सूरज : ख़ुशबू शर्मा ढल गया दे के रोशनी सूरज कह गया बात इक नई सूरज एक्टिंग डूबने की करता

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Shikshak : Gemini Haryaanavi

विद्यार्थी नहले टीचर दहला : जैमिनी हरयाणवी कक्षा में विद्यार्थियों का शोर सुन कर प्रिंसिपल कहने लगा- “हे डियर टीचर

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Patrakaar : Chirag Jain

पत्रकार : चिराग़ जैन छाप-छूप कर अख़बार एक सनसनीबाज़ पत्रकार रात तीन बजे घर आया तकिये में मुँह छुपाया और

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Roz peene ka bahana chahiye : Hullad Moradabadi

रोज़ पीने का बहाना चाहिए : हुल्लड़ मुरादाबादी हौसलों हो आज़ामाना चाहिए मुश्किलों में मुस्कुराना चाहिए खुजलियाँ जब सात दिन

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Zarurat Kya Thi : Hullad Moradabadi

ज़रूरत क्या थी : हुल्लड़ मुरादाबादी आइना उनको दिखाने की ज़रूरत क्या थी वो हैं बन्दर ये बताने की ज़रूरत

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Kya Karegi Chandni : Hullad Muradabadi

क्या करेगी चांदनी : हुल्लड़ मुरादाबादी चांद औरों पर मरेगा, क्या करेगी चांदनी प्यार में पंगा करेगा, क्या करेगी चांदनी

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Khoon Bolta Hai : Arun Gemini

ख़ून बोलता है : अरुण जैमिनी सीमा पर जैसे ही छिड़ी लड़ाई देशभक्ति की भावना सब में उमड़ आई कुर्बानी

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Kavi

आत्मा के सौंदर्य का, शब्द रूप है काव्य मानव होना भाग्य है, कवि होना सौभाग्य –Gopaldas Niraj कविता करना खेल

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Ahinsawadi : Pradeep Chobey

अहिंसावादी : प्रदीप चौबे बात बहुत छोटी थी श्रीमान् विज्ञापन था- पहलवान छाप बीड़ी और हमारे मुँह से निकल गया

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Hindi Diwas ke Dohe : Urmilesh Shankhdhar

हिंदी दिवस के दोहे : उर्मिलेश शंखधर हिंदी भाषा ही नहीं, और न सिर्फ़ ज़ुबान। यह अपने जह हिंद के

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Chal Gai-Shail Chaturvedi

चल गई : शैल चतुर्वेदी वैसे तो एक शरीफ इंसान हूं आप ही की तरह श्रीमान हूं मगर अपनी आंख

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Ghazal : Aatm Prakash Shukla

आत्मप्रकाश शुक्ल : ग़ज़ल आग पी कर पचाने को दिल चाहिए इश्क़ की चोट खाने को दिल चाहिए नाम सुकरात का तो सुना है बहुत मौत से मन लगाने को दिल चाहिए अपने हम्माम में कौन नंगा नहीं आईना बन के जाने को दिल चाहिए राख हो कर शलभ ने शमा से कहा अपनी हस्ती मिटाने को दिल चाहिए आम यूँ तो बहुत ढाई अक्षर मगर प्यार कर के निभाने को दिल चाहिए

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Sugandh lagti Ho Tum : Aatmprakash Shukla

आत्मप्रकाश शुक्ल : छंद लगती हो तुम छंद घनानंद के, छुअन रसख़ान जैसी शिल्प में बिहारी की सुगंध लगती हो

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Aatmprakash Shukla : Naache nadiya Beech Hilor

आत्मप्रकाश शुक्ल : नाचै नदिया बीच हिलोर नाचै नदिया बीच हिलोर बन में नचै बसंती मोर लागै सोरहों बसंत को

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Maati Ka Palang Mila : Aatmaprakash Shukla

काँच का खिलौना : आत्मप्रकाश शुक्ल माटी का पलंग मिला राख का बिछौना ज़िन्दगी मिली कि जैसे काँच का खिलौना

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