Tag Archives: Comic Poetry

Patrakaar : Chirag Jain

पत्रकार : चिराग़ जैन छाप-छूप कर अख़बार एक सनसनीबाज़ पत्रकार रात तीन बजे घर आया तकिये में मुँह छुपाया और चादार तान के सो गया, इतनी देर में उसका अख़बार जनता के हवाले हो गया। इधर पत्रकार चैन से खर्राटे … Continue reading

Tagged , , , , , |

Roz peene ka bahana chahiye : Hullad Moradabadi

रोज़ पीने का बहाना चाहिए : हुल्लड़ मुरादाबादी हौसलों हो आज़ामाना चाहिए मुश्किलों में मुस्कुराना चाहिए खुजलियाँ जब सात दिन तक ना रुकें आदमी को तब नहाना चाहिए साँप नेता साथ में मिल जाएं तो लट्ठ नेता पर चलाना चाहिए … Continue reading

Tagged , , |

Zarurat Kya Thi : Hullad Moradabadi

ज़रूरत क्या थी : हुल्लड़ मुरादाबादी आइना उनको दिखाने की ज़रूरत क्या थी वो हैं बन्दर ये बताने की ज़रूरत क्या थी घर पे लीडर को बुलाने की ज़रूरत क्या थी नाश्ता उसको कराने की ज़रूरत क्या थी दो के … Continue reading

Tagged , , |

Kya Karegi Chandni : Hullad Muradabadi

क्या करेगी चांदनी : हुल्लड़ मुरादाबादी चांद औरों पर मरेगा, क्या करेगी चांदनी प्यार में पंगा करेगा, क्या करेगी चांदनी चांद से है ख़ूबसूरत, भूख में दो रोटियां कोई बच्चा जब मरेगा, क्या करेगी चांदनी डिगरियां हैं बैग में पर … Continue reading

Tagged , , |

Khoon Bolta Hai : Arun Gemini

ख़ून बोलता है : अरुण जैमिनी सीमा पर जैसे ही छिड़ी लड़ाई देशभक्ति की भावना सब में उमड़ आई कुर्बानी का कुछ ऐसा चढ़ा जुनून कि घायल सैनिकों के लिए सभी देने लगे अपना-अपना ख़ून नेता हो या व्यापारी कवि … Continue reading

Tagged , , , |

Ahinsawadi : Pradeep Chobey

अहिंसावादी : प्रदीप चौबे बात बहुत छोटी थी श्रीमान् विज्ञापन था- पहलवान छाप बीड़ी और हमारे मुँह से निकल गया बीड़ी छाप पहलवान। बस, हमारे पहलवान पड़ोसी ताव खा गए ताल ठोककर मैदान में आ गए एक झापड़ हमारे गाल … Continue reading

Tagged , , |

Chal Gai-Shail Chaturvedi

चल गई : शैल चतुर्वेदी वैसे तो एक शरीफ इंसान हूं आप ही की तरह श्रीमान हूं मगर अपनी आंख से बहुत परेशान हूं अपने आप चलती है लोग समझते हैं- चलाई गई है जानबूझ कर मिलाई गई है। एक … Continue reading

Tagged , , , |