Tag Archives: Ghazal

Ghazal : Khwaja Meer Dard

ग़ज़ल : ख़्वाजा मीर ‘दर्द’ तोहमतें चंद अपने ज़िम्मे धर चले जिस लिए आए थे हम सो कर चले ज़िन्दगी है या कोई तूफ़ान है हम तो इस जीने के हाथों मर चले आह! मत बस जी जला, तब जानिए जब … Continue reading

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Hasya Kavi Sammelan, Bhojpur

भोजपुर महोत्सव के अवसर पर संयोगवश दीपाली से ठीक एक दिन पहले, धनतेरस के पर्व पर आरा प्रशासन ने अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया। मीठी मीठी ठंड में आरावासियों ने चार घंटे तक कविताओं का रस लिया। … Continue reading

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