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Ghazal : Khwaja Meer Dard

ग़ज़ल : ख़्वाजा मीर ‘दर्द’ तोहमतें चंद अपने ज़िम्मे धर चले जिस लिए आए थे हम सो कर चले ज़िन्दगी है या कोई तूफ़ान है हम तो इस जीने के हाथों मर चले आह! मत बस जी जला, तब जानिए जब … Continue reading

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