अहिंसावादी : प्रदीप चौबे
बात बहुत छोटी थी श्रीमान्
विज्ञापन था-
पहलवान छाप बीड़ी
और हमारे मुँह से निकल गया
बीड़ी छाप पहलवान।
बस, हमारे पहलवान पड़ोसी
ताव खा गए
ताल ठोककर मैदान में आ गए
एक झापड़ हमारे गाल पर लगाया
हमें गुस्से की बजाय
महात्मा गांधी का ख्याल आया
हमने दूसरा गाल
पहलवान के सामने पेश कर दिया
मगर वो शायद
नाथूराम गोडसे का भक्त था
उसने दूसरे गाल पर भी धर दिया
फिर मुस्कुरा कर बोला-
एकाध और खाओगे?
लेकिन ये तो बताओ बेटा
तीसरा गाल कहाँ सेलाओगे? हमने कहा- पहलवान जी आपकी इस अप्रत्याशित कार्यवाही ने हमें बड़े संकट में डाल दिया है गांधी जी ने ये तो कहा था कि कोई एक गाल पर मारे तो दूसरा लेकर आगे बढ़ना, परन्तु जल्दबाज़ी में वो ये बताना भूल गए कि तुम जैसा कोई पहलवान पल्ले पड़ जाए तो क्या करना! इसलिए हे पहलवान जी! आप ज़रा पाँच मिनिट यहीं ठहरना मैं अभी उनकी आत्मकथा पूरी पढ़कर आता हूँ शायद उसमें आगे कुछ लिखा हो। कहकर हम पी टी ऊषा की गति से घर में घुसे पहलवान के साथ-साथ सारे मुहल्लेवाले हमारी दुर्दशा पर हँसे लेकिन ठीक पंद्रह मिनिट बाद जब हम अपने घर से बाहर निकले तो हमारे बाएँ हाथ में मूँछ और दाएँ हाथ में रिवॉल्वर था रिवाल्वर का निशाना पहलवान की छाती पर था रिवाल्वर देखते ही पहलवान हकलाने लगे बोले- ये…ये…क्या त…त…तुम….तो म…म…महात्मा गांधी के भ…भ…भक्त हो! हमने कहा- हूँ नहीं, था! लेकिन अभी-अभी पन्द्रह मिनिट पहले मैंने उनकी पार्टी से इस्तीफ़ा देकर चंद्रशेखर आज़ाद की पार्टी ज्वाइन कर ली है पूरी रिवाल्वर गोलियों से भर ली है अब बोलो बेटा पहलवान पहलवान छाप बीड़ी या बीड़ी छाप पहलवान? पहलवान बोले- हें…हें…हें… जैसा आप ठीक समझें श्रीमान्! हमने कहा- श्रीमान् के बच्चे साले, गुंडे, लफंगे, लुच्चे अहिंसावादियों को डराता है! महात्मा गांधी के भक्तों का मज़ाक उड़ाता है! ख़बरदार, आगे से पहलवानी दिखाई तो हाथ-पैर तोड़कर अखाड़े में डाल दूंगा, इसी रिवाल्वर से खोपड़ी का गूदा निकाल दूंगा। मुहल्ले वालो! आगे से क़सम खा लो आज से कोई इस पिद्दी पहलवान की दादागीरी नहीं सहेगा इस देश में अगर अहिंसावादी नहीं रह पाया तो कोई आतंकवादी भी नहीं रहेगा!