Kavi Sammelan and Indian Society

Indian Society में Kavi Sammelan इतनी गहराई तक जुड़ा है कि सामाजिक प्रवृत्तियों का विश्लेषण और History of Kavi Sammelan परस्पर पर्याय बन चुका है। साल भर में कोई ऐसा समय नहीं है जब Kavi Sammelan Organize न हो रहा हो। जहाँ कहीं भी जनता जुटती है वहीं कवि सम्मेलन की संभावना बन जाती है। भारतीय समाज में उत्सव मनाने के लिए अवसर की तलाश नहीं करनी पड़ती। भारत एक गौरवशाली इतिहास, समृद्ध सांस्कृतिक संपदा, विराट धार्मिक परंपरा और विशेष भौगौलिक परिस्थितियों से सुसज्जित है। विश्व के सर्वाधिक प्रतिष्ठित धर्मों के अनेक महापुरुष भारतभूमि पर जन्मे हैं। बुद्ध, महावीर, राम, कृष्ण, नानक, अकबर, गांधी जैसे अनेक विचार प्रवर्तकों से सम्पन्न इस देश में सामाजिक उत्सवों के विशेष प्रयोजन भी स्वतः सिद्ध हैं और इन आयोजनों के हेतु उपलक्ष्य भी हर रोज़ उपलब्ध हो जाते हैं।

कवि सम्मेलन भारतीय समाज के किसी भी उत्सव में आसानी से आयोजित होने वाला परंपरागत संचार माध्यम है। इसकी लोकप्रियता का एक महत्वपूर्ण कारण है इसका ढाँचा। यह न तो गूढ़ शास्त्रार्थ अथवा विशुद्ध साहित्यिक गोष्ठी की तरह विद्वत समाज तक सीमित है; न ग्लैमर और पश्चात्यता के रंग में सराबोर होकर अश्लीलता की सीमा में प्रविष्ट होता है और न ही भौंडे हास्य से लबरेज हल्के मनोरंजन मध्यमों की तरह स्तरहीन है। एक ही कवि सम्मेलन में एक साथ प्रोफेसर से लेकर निरक्षर श्रमिक तक और कॉरपोरेट कल्चर के व्यक्ति से लेकर किराने के दुकानदार तक सबको मनोरंजन एवं बौद्धिक ख़ुराक़ मिल जाती है।

आर्थिक पक्ष पर जाएँ तो live Entertainment के सभी विकल्पों में सबसे कम ताम-झाम और सबसे कम व्यय होता है Kavi Sammelan के आयोजन में। इसके साथ ही इस कार्यक्रम की सफलता का प्रतिशत भी अन्य सभी कार्यक्रमों की तुलना में सर्वाधिक है। यही कारण है कि वर्ष भर कवि सम्मेलन के लिए निम्न अवसरों को उपयोग किया जाता है।

1) Holi : होली भारतीय समाज और विशेषकर Hindi Belt में एक ऐसा पर्व है जिसका उल्लास प्रत्येक वर्ग के सिर चढ़कर बोलता है। यह पर्व हास्यरस प्रधान है इसलिए इस अवसर पर Hasya Kavi Sammelan की उपादेयता स्वतः सिद्ध होती है। प्रत्येक सामाजिक संगठन “Holi Milan” का कार्यक्रम आयोजित करता है। इस आयोजन में Cultural Events के नाम पर Hasya Kavi Sammelan सर्वाधिक उपयुक्त Entertainment है। दो कवियों से लेकर 12-15 कवियों तक के Kavi Sammelan Organise होते हैं। एक कवि को एक दिन में दो से लेकर पाँच तक कार्यक्रम करने पड़ते हैं। ये सभी कवि सम्मेलन हास्यरस प्रधान होते हैं।

2) Mahavir Jayanti : Bhagwan Mahaveer Swami का जन्मोत्सव भी Kavi Sammelan के बिना अधूरा सा लगता है। देश भर में सैंकड़ो Kavi Sammelan Mahaveer Jayanti के Occasion पर organise किये जाते हैं। छोटे-छोटे आयोजनों से लेकर भव्य auditorium में शानदार टीम के साथ भी Mahavir Jatanti Kavi Samnelan organise होता है। इन कवि सम्मेलनों को कवि सम्मेलनों का परंपरागत स्वरूप कहा जा सकता है जिसमें श्रृंगार, ओज, दर्शन तथा हास्य का संतुलन देखने को मिलता है।

3) Maharana Pratap Jayanti : Rajasthan में Maharana Pratap Jayanti भी Kavi Sammelan के आयोजन का प्रमुख Occasion है। वीर रस प्रधान इन कवि सम्मेलनों में patriotism, शक्तिबोध और शौर्य की कविताओं का बोलबाला रहता है। कुछ आयोजन रात भर चलते हैं तो कहीं कहीं तीन-चार घंटे की समयावधि के Kavi Sammelan Organize किये जाते हैं। इस अवसर पर Municipal Corporation और Government Organizations द्वारा भी अनेक Kavi Sammelan Organize किये जाते हैं।

4) Teej Mela : Rajasthan में मनाया जाने वाला एक प्रमुख पर्व है Haryali Teej। छोटे-छोटे Ladies Clubs, NGO’s, स्वयंसेवी संस्थाएं और यहाँ तक कि सरकारी कार्यालयों में बने हुए महिला क्लबों के द्वारा Teej Milan, Teej Mela और Sajjan Goth (सज्जन-गोठ) का आयोजन किया जाता है। इन आयोजनों का स्तर Community Centres से लेकर Five Star Hotels तक संभव है। इन Kavi Sammelan Events में एक से लेकर पाँच कवियों तक के Hasya Kavi Sammelan Organize किये जाते हैं। Rajasthan, Delhi, Kolkata, Guwahati, mumbai, Raipur और Bhubaneshwar में इस तरह के आयोजनों की भरमार होती है।

5) Independence Day : 15 अगस्त के अवसर पर अनेक Government Organizations, Political Organizations, Public Sector Untertakings, Educational Institutions तथा Corporate World तक देश की आज़ादी का जश्न मनाने के उद्देश्य से Kavi Sammelan Organize कराने की परंपरा है। इन कवि सम्मेलनों में देश के मूर्धन्य कवियों से लेकर नवागंतुकों तक कि खूब व्यस्तता देखने को मिलती है। राष्ट्रप्रेम की भावना से ओतप्रोत इन कार्यक्रमों में जनता भारत भूमि से जुड़े होने का स्वाभिमान अनुभव करती है।

6) HINDI PAKHWADA : राजभाषा हिंदी को दैनिक कामकाज में क्रियान्वित करने के उद्देश्य से देश के सभी छोटे-बड़े सरकारी, अर्धसरकारी कार्यालयों में मुख्यालय तथा क्षेत्रीय कार्यालय के स्तर पर “हिंदी पखवाड़े” का आयोजन अनिवार्य है। इस पखवाड़े में हिंदी से जुड़ी प्रतियोगिताएं, कार्यशालाएं, गतिविधियां आयोजित करने के लिए प्रत्येक कार्यालय बाध्य है। इस दौरान 50 प्रतिशत कार्यालय कवियों को भी याद करते हैं। कहीं पूरी टीम के साथ भव्य Kavi Sammelan के आयोजन की परंपरा है तो कहीं पखवाड़े के उद्घाटन अथवा समापन के अवसर पर एक कवि को बुलाकर पुरस्कार वितरण करवाकर औपचरिकता निभा देने का प्रचलन है। राजभाषा के प्रचार-प्रसार के हित आयोजित होने वाले इन कार्यक्रमों में सीमित बजट होने के बावजूद कवियों की उपलब्धता में समस्या नहीं आती क्योंकि हिंदी के विकास के इस सरकारी प्रयास में सभी कवि निजी हित त्याग कर सहयोग करते हैं।

7) Ganeshotsava : Maharashtra, Madhya Pradesh और अब तो Delhi NCR समेत पूरे देश में गणपति बप्पा मोरिया का ख़ूब ज़ोर रहता है। बड़े बड़े पंडाल लगाकर गणपति जी का उत्सव मेले के रूप में मनाया जाता है। इन उत्सवों में एक दिन Kavi Sammelan भी अवश्य आयोजित किया जाता है।

8) पर्युषण एवं क्षमावाणी : जैन समाज के पर्युषण पर्व दस दिन तक त्याग और धर्म की छटा बिखेरते हैं। हर रोज़ मंदिरों में Cultural programmes का आयोजन किया जाता है। इन दस दिनों में से एक दिन कवि सम्मेलन का आयोजन लगभग तय होता है। देश के प्रत्येक हिस्से में Jain Kavi Sammelan की श्रृंखला बन जाती है। लोकप्रियता के प्रत्येक स्तर का कवि रोज़ाना कहीं न कहीं कविता पढ़ रहा होता है। इस समय Digambar Jain संतों के चातुर्मास का सुयोग इन कवि सम्मेलनों को प्रत्येक दृष्टि से भव्य बना देता है।

9) Agrasen Jayanti : प्रथम नवरात्रि का दिन महाराज अग्रसेन जी की जयंती के रूप में मनाया जाता है। Vaishya Samaj प्रारम्भ से ही Kavi Sammelan के आयोजन में अग्रणी रहा है, इसलिए यह अवसर पूरे देश में Agrasen Jayanti Kavi Sammelan का महापर्व बन जाता है। इस उपलक्ष्य में सैंकड़ो कवि सम्मेलन एक सप्ताह के भीतर आयोजित होते हैं।

10) Navratri तथा Dussehra : Ramlila का आयोजन देश के अनेक शहरों में परंपरागत उत्सव का रूप ले चुका है। मौसम की दृष्टि से भी उत्सव आदि के लिए सितम्बर-अक्टूबर का समय सर्वाधिक अनुकूल है। यही कारण है कि Gujarat में Navratri, Maharashtra – Madhya Pradesh में Ganeshotsava, Delhi – Haryana में Ramlila और Bangal – Bihar में Durgapuja सब आयोजन दस-दस दिन तक चलते हैं। रामलीलाओं में किसी एक दिन लीला मंचन के उपरांत Kavi Sammelan का आयोजन आवश्यक सा हो गया है।

11) Dipawali : Holi Milan की तर्ज पर Diwali Milan भी अब बड़े शहरों में आयोजित होने लगे हैं। Diwali Mela भी कहीं-कहीं निश्चित कार्यक्रम बन चुका है। इन उत्सवों में भी Hasya Kavi Sammelan का आयोजन किया ही जाता है।

12) New Year : अंग्रेजी नववर्ष मनाने की यह परंपरा है कि 31 December की रात को जश्न के साथ नववर्ष का स्वागत किया जाए। इस परंपरा के निर्वहन में पूरी दुनिया 31 दिसंबर की रात अलग अलग तरीके से जश्न मनाती है। भारत में अनेक स्थानों पर यह अवसर भी Kavi Sammelan के आयोजन का उपलक्ष्य बन चुका है। लोग मानते हैं कि HASYA Kavi Sammelan करवाने से हम हँसते-हँसते नए साल में प्रवेश करते हैं। कुछ संस्थाएं वर्ष के प्रथम दिवस 1 January को भी Kavi Sammelan करवाती हैं ताकि नए साल के पहले दिन उनके जीवन में ठहाके बने रहें।

13) Vivekanand Jayanti : Swami Vivekananda का जन्मदिवस Yuva Divas के रूप में मनाया जाता है। भारतीय दर्शन के चितेरे विवेकानन्द के जन्मोत्सव पर देश की अनेक स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा Kavi Sammelan Organize किया जाता है।

14) Republic Day : Indian Democracy की प्रतिष्ठा के प्रतीक इस पर्व पर अनेक सरकारी व ग़ैर-सरकारी Kavi Sammelan आयोजित होते हैं। यहाँ तक कि देश का सर्वाधिक प्रतिष्ठित “Lalkila Kavi Sammelan” भी गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में ही आयोजित किया जाता है।

15) Vasant Panchami : मौसम की अनुकूलता के इस पर्व पर अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। साहित्यिक व सांस्कृतिक संस्थाओं के द्वारा इस अवसर पर प्रमुख रूप से Kavi Sammelan करवाए जाते हैं।

16) मेले : हमारे देश में उत्सवधर्मिता एक प्रमुख गुण है। इसी प्रवृत्ति के आधार पर लगभग हर क्षेत्र में एक वार्षिक मेले का चलन प्रारम्भ हुआ। न्यूनाधिक सभी traditional fairs में साज-सज्जा से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक का रंग-रूप एक सा रहता है। आयोजन स्थल से लगभग दस-बीस किलोमीटर तक के क्षेत्रवासी हर मेले से जुड़े रहते हैं। देश का कोई भी वार्षिक मेला ऐसा नहीं है जिसमें तीन-चार दिन की अवधि में डेढ़-दो लाख की संख्या से कम जनता जुटती हो। इन मेलों में कवि सम्मेलन भी एक परंपरागत कार्यक्रम माना जाता है। विशेषकर हिंदी क्षेत्र में तो यह तथ्य शत प्रतिशत सत्य ही है। Meerut का Nauchandi Meka, Saradhna का Mela Budha Baba, Budhana का बूढ़ा बाबू मेला, Jaipur के Gangaur Mela, Alwar का Bhratrihari मेला, Jagannath Puri की Rathyatra, Kurukshetra का Gita Jayanti महोत्सव, Allahabad का kumbh मेला, Ujjain का अर्धकुम्भ, Nasik का अर्धकुम्भ, Varanasi के गंगा मेला, Haridwar का Gangasnan, Patna का Chhath पूजा, Faridabad का Surajkund Art & Craft मेला, दिल्ली में Jain Mela, Janmashtmi, Sharadotsava, International Trade Fair, World Book Fair, Auto Expo, Shilpotsava, Baisakhi Mela, Himachal Pradesh के Dussehra, Shri Mahavir Ji की Rathyatra, Tijara की Rathyatra, Sonagir की Rathyatra, Chittaurgarh का Veer Tejaji Mela, Jaipur की makar Sankranti, Pushkar का पशु मेला जैसे सैंकड़ों आयोजनों में कवि सम्मेलन प्रमुख आकर्षण बनता है।

17) प्रशासनिक स्थापना दिवस : Bhojpur Mahotsava, Nalanda Mahotsava, Bihar Divas, Haryana Divas, Madhya Pradesh Divas, Uttarakhand Divas, Chhattisgarh Divas, Betwa Mahotsav, Chakradhar Samaroh, Narmada Mahotsav, Kosi Utsav, Chambal Mahotsav, Gwalior Mela, Matsya Utsav, Nimbaheda Utsav, Kekdi Utsav, Malwa Utsav, Taj Mahotsav, Lucknow Utsav, Saifai Mahotsav, Jhansi Utsav, Singrauli Mahotsava और अन्य ऐसे अवसर भी Kavi Sammelan के लिए सुनिश्चित ही होते हैं। Administration और Tourism Department की ओर से आयोजित होने वाले इन कार्यक्रमों का स्वरूप अत्यंत भव्य होता है।

18) जयंती व शहीदी दिवस : Bhagat Singh, Subhash Chandra Bose, Mahatma Gandhi, Jawaharlal Nehru, Indira Gandhi, Ramdhari Singh Dinkar, Sardar Vallabh Bhai Patel, Makhanlal Chaturvedi, Baba Nagarjun, Madan Mohan Malviya, Atal Bihari Bajpayee, Keshav Baliram Hedgewar, Veer Savarkar, Shyama Prasad Mukarjee, Bhimrao Ambedkar, Bal Thackrey, Chandrashekhar Azad, Rani Lakshmibai और chhatrapati Shivaji जैसे महापुरुषों के जन्मोत्सव तथा पुण्यतिथि के अवसर पर भी अनेक Kavi Sammelan आयोजित किये जाते हैं।

19) वार्षिकोत्सव : अनेक शिक्षण संस्थानों में वार्षिकोत्सव के अवसर पर Kavi Sammelan अवश्य आयोजित किया जाता है। IIT, IIM, NIT, IIIT, NIFT, BITS, AIIMS जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में तो कवि सम्मेलन सर्वाधिक चर्चित आयोजन के रूप में जाना जाता है। इसके अतिरिक्त Delhi University, Kurukshetra University, Nalanda Medical College, Guru Jrimbheshwar University, Jamia Millia Islamia, Jawaharlal Nehru University, Maulana Azad Medical College, Subharti Medical College, Rajasthan Vishvavidyalaya, Indraprasth University, Mangalaytan, Makhanlal Chaturvedi Rashtriya Patrakarita Vishwavidyalaya, IGNOU, Himachal University, Chaudhri Charan Singh University, Ambedkar University, Jain Vishva Bharti, AMU, Punjab University जैसे सरकारी शिक्षण संस्थानों के अतिरिक्त निजी इंजीनियरिंग कॉलेज, मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट, लॉ कॉलेज, मेडिकल कॉलेज तथा अन्य सभी शिक्षण संस्थाओं में kavi Samnelan organize होना निर्धारित है।

20) कॉरपोरेट : संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, सभी मंत्रालय, विधानसभाएं, नगर निगम, विभागीय इकाइयाँ और अकादमियां तो कवि सम्मेलनों की मुरीद रही ही हैं किंतु अब Corporate में भी kavi Sammelan के आयोजन में बढ़-चढ़ कर रुचि प्रकट कर रहा है। RIL, WELSPUN, JP INDUSTRIES, JINDAL STEELS, जयभारत मारुति उद्योग, NESTLE, ATLAS, CONCOR, NHAI, CRRI, LIC, NISE, PUSA, THDC, G4S, EXCEL, TCIL, SAIL, BHEL, AAI, SUPERTECH, ONGC, INDIAN OIL, DCM, ANSALS, NTPC, NHPC, GAIL, TRAI, POWERGRID, POSOCO, BRITANNIA, BRU, PATANJALI और Banking Sector (Bank Of India, Punjab National Bank, Stater Bank of India, IDBI, SIDBI, Canara Bank, Co-operative Banks etc.) आदि से जुड़े तमाम उपक्रम नियमित रूप से Kavi Sammelan का आयोजन करवाते हैं। ज्वेलर्स असोसिएशन, व्यापार मंडल, मार्किट एसोसिएशन, LIONS CLUB, ROTARY CLUB, प्रिंटर्स एसोसिएशन और ऐसे तमाम समूह अपने यहाँ कवि सम्मेलन आयोजित करवाते हैं। बॉलीवुड के अवार्ड फंक्शन्स हों या क्रिकेट के ग्रैंड सलेब्रेशन्स; कवि सम्मेलन हर उत्सव में दिखाई दे जाता है। Dealers Meet, Corporate meet, annual day और product launch के अवसर पर भी Kavi Sammelan का आयोजन आम हो चला है।

21) पारिवारिक उत्सव : Marwadi weddings तो लंबे समय से Kavi Sammelan को अपना आवश्यक अंग बना ही चुके थे किंतु अब Destination Wedding के चलन ने इस परंपरा को और अधिक पुष्ट किया है। शादी की सालगिरह, जन्मोत्सव, रजत जयंती, स्वर्ण जयंती, हीरक जयंती जैसे अवसरों पर भी कविता सुनने का कार्य परिवार के साथ बैठ कर उत्साह पूर्वक सम्पन्न किया जाने लगा है।

इन सबके अतिरिक्त इस देश की सीमाओं के पार United State of America, England, Belgium, Australia, Netherlands, New Zealand, Germany, South Africa, Suriname, Fiji, Trinidad, Indonesia, Malaysia, Mauritius, Myanmar, Hong Kong, China, Nepal, Bhutan, Japan, Oman, Abu Dhabi, Tanzania, Kenya, United Arab Emirates, Singapore, Thailand, South Korea, North Korea, Iran, Tehran, Turkestan, Russia, Uzbekistan, Denmark, Pakistan, Kuwait, Sri Lanka, France, Switzerland, Canada और जहाँ जहाँ भी भारतीय लोग बसते हैं; वहाँ-वहाँ कवि सम्मेलनों का भव्य आयोजन किया जाता है।

गली-मोहल्लों के नुक्कड़ पर तम्बू गाड़ कर बनाए गए मंचों से लेकर लाखों रुपयों की लागत से तैयार ग्लैमरस स्टेज तक कवि सम्मेलन हर जगह अपनी सादगी को कायम रखते हुए फिट हो जाता है। न्यूज़ बुलेटिन हो या रिएलिटी शो; कवि को हर माहौल में स्वयं को ढालना आता है। लाफ्टर नाइट की शुद्ध चुटकुलेबाजी से लेकर गीत चांदनी जैसे ख़ालिस काव्य समारोह तक कवि पूरी ईमानदारी से अपनी भूमिका का निर्वाह कर सकता है। कवि सम्मेलनों की यही ताक़त आज Times of India, नवभारत टाइम्स, हिंदुस्तान, दैनिक जागरण, हरिभूमि, दैनिक भास्कर, अमर उजाला, नवज्योति, राजस्थान पत्रिका और नवभारत जैसे सभी प्रकाशन समूहों को साल में पचास-पचास कवि सम्मेलन आयोजित करने पर विवश करती है। यूट्यूब पर इन दिनों कवि सम्मेलनों की वीडियो सर्वाधिक लोकप्रिय सामग्री में गणित हो रही है। कवि-सम्मेलनों की यह परंपरा अपने स्वर्णिम युग को जीती है तो भारतीय समाज के बौद्धिक मनोरंजन के शिलालेख पर एक चमकदार काव्यांश उभरता है –
“आत्मा के सौंदर्य का शब्द रूप है काव्य।
मानव होना भाग्य है, कवि होना सौभाग्य।।”

© चिराग़ जैन