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Ghazal : Aatm Prakash Shukla
आत्मप्रकाश शुक्ल : ग़ज़ल
आग पी कर पचाने को दिल चाहिए
इश्क़ की चोट खाने को दिल चाहिए
नाम सुकरात का तो सुना है बहुत
मौत से मन लगाने को दिल चाहिए
अपने हम्माम में कौन नंगा नहीं
आईना बन के जाने को दिल चाहिए
राख हो कर शलभ ने शमा से कहा
अपनी हस्ती मिटाने को दिल चाहिए
आम यूँ तो बहुत ढाई अक्षर मगर
प्यार कर के निभाने को दिल चाहिए