जय हे जय हे जय हे : रबीन्द्रनाथ टैगोर
जन-गण-मन अधिनायक जय हे भारत-भाग्य-विधाता पंजाब-सिन्ध-गुजरात-मराठा द्राविड़-उत्कल-बंग विन्ध्य-हिमाचल, यमुना-गंगा उच्छल जलधि तरंग तव शुभ नामे जागे तव शुभ आशिष मांगे गाहे तव जय गाथा जन-गण-मंगलदायक जय हे भारत-भाग्य-विधाता जय हे, जय हे, जय हे जय-जय-जय, जय हे पतन-अभ्युदय-वन्धुर-पंथा युग-युग धावित यात्री हे चिर-सारथी तव रथचक्रे मुखरित पथ दिन-रात्रि दारुण विप्लव-माँझे तव शंखध्वनि बाजे संकट-दुख-श्राता जन-गण-पथ-परिचायक जय हे भारत-भाग्य-विधाता जय हे, जय हे, जय हे जय-जय-जय, जय हे घोर-तिमिर-घन-निविड़-निशीथ पीड़ित मूर्च्छित-देशे जागृत दिल तव अविचल मंगल नत-नत-नयन अनिमेष दुस्वप्ने आतंके रक्षा करिजे अंके स्नेहमयी तुमि माता जन-गण-मन-दुखत्रायक जय हे भारत-भाग्य-विधाता जय हे, जय हे, जय हे जय-जय-जय, जय हे रात्रि प्रभातिल उदिल रविच्छवि पूरब-उदय-गिरि-भाले साहे विहंगम, पूर्ण समीरण नव-जीवन-रस ढाले तव करुणारुण-रागे निद्रित भारत जागे तव चरणे नत माथा जय-जय-जय हे, जय राजेश्वर भारत-भाग्य-विधाता जय हे, जय हे, जय हे जय-जय-जय, जय हे