Akhil Bharatiya Kavi Sammelan in Gwalior featuring Padma Shri Dr. Surendra Sharma and Praveen Shukla
मिला वृद्ध माँ के स्तनों से दूध बह चला बूढ़ा बाप पाँव थाम पूछने लगा बोलो कैसा मेरा लाडला डाकिये के नैन अश्रु झाड़ते रहे कैसे भर सकेगा उनके कर्ज को वतन प्राण दिए पर न लिया हाथ भर क़फ़न संधियों पे और लोग दस्तख़त करें वे निभा गए हैं देश को दिया वचन प्राण दे के जय वतन पुकारते रहे पूछ रहीं रखियाँ, कलाइयाँ कहाँ बेवा दुल्हनों की शहनाइयाँ कहाँ बालहठ पूछे कब आएंगे पिता गिन-गिन काटें दिन प्यास रक्त की नदी के नीर से बुझी नहीं दानवों की कौम देवताओं से मिली नहीं शांति के कपोत फड़फड़ा के पंख रह गए युद्ध के पिशाच बाज की झपट रुकी नहीं हम अपन का पक्ष ही पुगालते रहे