Kavi

आत्मा के सौंदर्य का, शब्द रूप है काव्य
मानव होना भाग्य है, कवि होना सौभाग्य
Gopaldas Niraj

कविता करना खेल नहीं है, पूछो उन फ़नक़ारों से
जो लोहे को काट रहे हैं, काग़ज़ की तलवारों से
-अज्ञात

इक दफ़ा पलकों को अश्क़ों में भिगो लेते हैं हम
और फिर होंठों पे इक मुस्कान बो लेते हैं हम
गीत गाते वक़्त रुंध ना जाए स्वर इसके लिये
गीत लिखते वक़्त ही जी भर के रो लेते हैं हम
Chirag Jain

ऐलान कर रहे हैं बड़ी आज़िजी से हम
डरते नहीं ख़ुदा के अलावा किसी से हम
वो शायरी जो मीर को रोटी न दे सकी
दौलत कमा रहे हैं उसी शायरी से हम
-अज्ञात

चंद पल तेरी बाँहों में हम जी लिये
यूँ लगा जैसे जन्मो-जनम जी लिये
बादशाहों को भी कब मयस्सर हुई
ज़िंदगानी जो एहले क़लम जी लिये
-Rajgopal Singh

डूब कर तुम सुनो, और सुन कर गुनो
हमसे मन से जुड़ोगे तो जुड़ जाएंगे
वरना हम हैं परिंदे बहुत दूर के
बोलियाँ बोल कर अपनी उड़ जाएंगे
-अज्ञात